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PM Modi China Visit: पीएम मोदी और चिनफिंग ट्रंप टैरिफ के अलावा इन मुद्दों पर करेंगे चर्चा, क्या है पूरा प्लान?_我的网站

射雕英雄传83版

一 |     해양법·정책 교육 프로그램 공동 개발공동연구·인력·학술정보 교류 추진해양수도 부산 법률교육 기반 강화                    김현수 부산대 법학전문대학원장 등 양 기관 관계자들이 24일 부산대 법학전문대학원 학봉홀에서 해사법무 및 해양법·정책 분야 교육·연구 협력을 위한 업무협약을 체결한 뒤 기념촬영을 하고 있다. 부산대 제공. 부산대학교 법학전문대학원과 한국해양과학기술원(KIOST) 해양법·정책연구소가 해사법무와 해양법·정책 분야 전문인력 양성에 협력한다. 부산대는 두 기관이 지난 24일 교내 법학전문대학원 학봉홀에서 교육·연구 협력체계 구축을 위한 업무협약을 체결했다고 26일 밝혔다. 협약에 따라 두 기관은 해사법무 및 해양법·정책 분야 교육 프로그램을 공동으로 개발·운영한다. 공동연구와 학술협력, 교수·연구자·학생 교류, 학술자료와 정보 공유도 추진한다. 부산대 법학전문대학원은 해운과 항만, 해양환경, 해양안전 등과 연계한 법률교육을 확대하고 실무와 이론을 갖춘 해사·해양 분야 전문 법률가를 양성할 계획이다. 김현수 부산대 법학전문대학원장은 “전문 연구기관과의 협력을 바탕으로 해양 분야 법률·정책 역량을 강화해 나가겠다”고 말했다.。

二 |     जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। आगामी रविवार (31 अगस्त) को तियानजिन में एससीओ सम्मेलन के इतर पीएम नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच होने वाली द्विपक्षीय मुलाकात दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।,दरअसल, अक्टूबर, 2024 में कजान (रूस) में हुई अपनी मुलाकात में ही पीएम नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच भारत व चीन के द्विपक्षीय संबंधों की नई शुरुआत को लेकर बातचीत हुई थी। चीन ने शीर्ष स्तर पर भारत के साथ सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ ही सभी द्विपक्षीय हितों को सुलझाने को लेकर आश्वस्त किया है।,ट्रंप प्रशासन की तरफ से 50 फीसद शुल्क लगाये जाने को लेकर परेशानी में पड़े भारत सरकार का आकलन है कि चीन व भारत साथ मिल कर मौजूदा वैश्विक अस्थिरता को संयमित कर सकते हैं जिसका सबसे ज्यादा लाभ इन दोनों देशों को हो सकता है।,पीएम मोदी जापान यात्रा समाप्त करने के बाद चीन के शहर तियानजिन पहुंचेंगे। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में चीन ने दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और आसियान के अधिकांश देशों को आमंत्रित कर रखा है। इस व्यवस्तता के बावजूद राष्ट्रपति चिनफिंग ने पीएम मोदी से मुलाकात के लिए 40 मिनट का समय निकाला है।,सूत्रों का कहना है कि, “मोदी और चिनफिंग की यह मुलाकात सिर्फ ट्रंप की शुल्क नीति के नजरिए से नहीं देखनी चाहिए। दोनों नेताओं की अक्टूबर, 2024 की मुलाकात के बाद द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने को लेकर कई स्तरों पर काम हो रहा है। सीमा विवाद सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधि स्तर की दो बार वार्ताएं हुई हैं। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच तीन बार विस्तार से बैठकें हो चुकी हैं। इन सभी बैठकों में दोनों देशों ने यह माना है कि सीमा पर स्थाई सांति के लिए लगातार प्रबंधन की जरूरत है। यह भी ध्यान रखना होगा कि वर्ष 2020 के बाद दोनों देशों की सीमाओं पर शांति बनी हुई है।'',पिछले दिनों नई दिल्ली में चीन के विदेश मंत्री वांग यी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की बैठक में पहली बार सीमा विवाद सुलझाने के लिए दस सूत्रीय एजेंडे पर सहमति बनी है। ऐसा पहली बार हुआ है। भारतीय पक्ष यह मान रहा है कि भारत व चीन साथ मिल कर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अभी स्थिरता ला सकते हैं। भारत व चीन का सहयोग ट्रंप की शुल्क नीति से वैश्विक विकास दर पर नकारात्मक असर को कम कर सकता है। इसका फायदा भारतीय इकोनमी को भी मिलेगा।,इसके अलावा भारत यह मान रहा है कि चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने की वजह से मौजूदा माहौल में भारत की विकास दर को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। खास तौर पर तब जब भारत के लिए पारंपरिक तौर पर आकर्षक अमेरिका व पश्चिमी देशों में बाजार की स्थिति अनिश्चित है।,सूत्रों के मुताबिक, “यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद जिस तरह से वैश्विक बदलाव हम देख रहे हैं उससे हमें बहुधुव्रीय विश्व बनाने की दिशा में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत महसूस हो रही है।'' ऐसे में पीएम मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग के बीच होने वाली मुलाकात में कारोबारी बाधाओं को दूर कर चीनी बाजार में भारतीय उत्पादों के प्रवेश को आसान करने और दोनो देशों की जनता के बीच संपर्क को बढ़ावा देने का मुद्दा भी अहम रहेगा।,भारत को उम्मीद है कि इन मुद्दों पर चीन का शीर्ष नेतृत्व सकारात्मक कदम उठा कर आपसी विश्वास को और बढ़ाएगा। यह भी पढ़ें- पीएम मोदी-पुतिन और चिनफिंग की तिकड़ी निकालेगी ट्रंप के टैरिफ का तोड़? SCO शिखर सम्मेलन से जुड़ी पूरी डिटेल。

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Published on:18:06:53


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